TOP 10 Best Hindi Novels सर्&

: दोस्तों आज हमने हिंदी भाषा में लिखे गएकी किताबों की लिस्ट बनाई है इसमें हमने सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली 10 किताबों को चुना है. इन पुस्तकों को पढ़कर आप हिंदी भाषा की गहराई को जान सकते हैं साथ ही जीवन में घटने वाली घटनाओं को भी जान सकते है.

हिंदी साहित्यबहुत बड़ा है इसको जितना पढ़ा जाए उतना ही कम है लेकिन अगर आप नीचे दे गई किताबों में से कोई भी किताब चाहिए तो आप हिंदी साहित्य की ओर खिंचे चले जाएंगे.बेस्ट हिंदी नोवेल्स

मैला आंचल हिंदी में सन् 1954 प्रकाशित हुआ सबसे श्रेष्ठ उपन्यास है. यह उपन्यास फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा लिखा गया है. इस उपन्यास में भारत की स्वतंत्रता के ठीक बाद देश की सामाजिक, राजनीतिक, व्यक्तिगत, आर्थिक परिदृश्य का ग्रामीण संस्करण है.

इस उपन्यास में भारत के ग्रामीण इलाकों के जनजीवन, भाषा, लोक संस्कृति, वेशभूषा, विश्वास, अंधविश्वास, सुख-दु:ख की तस्वीर को एक कहानी के रूप में पिरोकर जीवंत रूप दिया गया है. मैला आंचल को हिंदी साहित्य का पहला सर्वश्रेष्ठ और आंचलिक उपन्यास माना जाता है

मैला आंचल का नायक एक युवा डॉक्टर है जो कि अपनी संपूर्ण पढ़ाई-लिखाई के बाद अपने कार्य क्षेत्र के लिए भारत के बिहार राज्य के पुरिया जिले को चुनता है वह वहां मलेरिया और कालाजार पर शोध करने जाता है लेकिन वहां उसका सामना गांव में फैले अंधविश्वास, कुरूतियो,किसानों की दुर्दशा सामाजिक शोषण-चक्रों में फंसी हुई जनता से साक्षात्कार होता है.

(2) राग दरबारी (Rag Darbari)

राग दरबारी श्रीलाल शुक्ल द्वारा लिखा गया कालजयी उपन्यास सन् 1968 में प्रकाशित हुआ था. यह हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध व्यंग रचना है इसके लिए श्रीलाल शुक्ल को सन् 1970 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

यह ऐसा उपन्यास है जिसमें गांव की कथा के माध्यम से पूरी सरकारी तंत्र को उधेड़ कर दिया गया है. इस पुस्तक की एक खास बात है कि जब भी इसको पढ़ा जाता है तो इसकी कहानी नई लगती है. कोई कह ही नहीं सकता कि यह पुस्तक 50 साल पहले लिखी गई है.

राग दरबारी पुस्तक में भारत की स्वतंत्रता के बाद देश में हो रही उथल-पुथल के बारे में लिखा गया है. इस पुस्तक में उत्तर प्रदेश के छोटे से कस्बे शिवपाल गंज की कहानी लिखी हुई है.

जहां पर गांव के विकास के ऊपर जोर दिया जा रहा है लेकिन वहां का सरकारी तंत्र भ्रष्ट हो चुका है और राजनीतिक पार्टियां नए-नए नारे देखकर अपनी राजनीति की रोटियां सेक रहे है. लोकहीत के नाम पर लोगों को पहले भी लूटा जाता रहा है और आज भी लोगों को लूटा जा रहा है.

(3) कितने पाकिस्तान (Kitne Pakistan)

कितने पाकिस्तान उपन्यास हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश्वर द्वारा लिखा गया है उपन्यास सन् 2003 में प्रकाशित हुआ था और इसके लिए कमलेश्वर को सन् 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

कितने पाकिस्तान उपन्यास को एक ऐतिहासिक उपन्यास का दर्जा दिया गया है. यह पुस्तक भारत पाकिस्तान के बंटवारे और हिंदू-मुस्लिम संबंधों के बारे में लिखी गई है.

इस उपन्यास में आपको कई सारी कहानियां पढ़ने को मिलेंगी जिनमें इतिहास की सच और झूठ के बारे में बताया गया है. इस उपन्यास में एक किरदार है जिसका नाम अदीप है वह स्वंय की अदालत लगाता है

और उस अदालत ने विश्व की प्राचीन सभ्यताएं, हमारा इतिहास, और वह लोग जिन्होंने मुल्को का बटवारा करवाया उनसे अतीत गवाही देता है और पूछता है युगो-युगो से युद्ध कौन करवा रहा है सभ्यताओं और संस्कृतियों का गला कौन घोट रहा है.

आखिरकार बंटवारे के नाम पर होने वाली हत्याओं का जिम्मेदार कौन है? इन सब बातों को बड़े ही रोचक ढंग से लिखा गया है.

चित्रलेखा भगवतीचरण वर्मा द्वारा रचित उपन्यास है यह उपन्यास सन् 1934 में प्रकाशित हुआ था, यह उपन्यास हिंदी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनूदित किया गया था जिसके कारण यह बहुत लोकप्रिय हुआ और नवें दशक तक इसकी ढाई लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी थी.

इसे धार्मिक और ऐतिहासिक उपन्यास कहा जाता है लेकिन यह मुख्य रूप से दार्शनिक उपन्यास है. इस उपन्यास में पाप और पुण्य के बारे में विस्तृत रूप से लिखा गया है.

चित्रलेखा उपन्यास पाप और पुण्य क्या है और यह कैसे, कहां होता है पर आधारित है. इस पुस्तक में हिंदी प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए महाप्रभु रत्नांबर के दो शिष्य, श्वेतांक और विशालदेव, क्रमश: सामंत बीजगुप्त और योगी कुमारगिरी की शरण में जाते है.

इस पुस्तक में एक खूबसूरत नृत्यकी का किरदार है जिसका नाम चित्रलेखा है, चित्रलेखा बीच गुप्त की प्रेमिका है लेकिन समय व्यतीत होने के साथ उसकी सुंदरता के जाल में योगी कुमारगिरी भी फंस जाता है.

एक बीज गुप्त जो भोग विलास में डूबा हुआ है और दूसरी तरफ मोक्ष प्राप्ति का उद्देश्य लिए हुए कुमार गिरी, इन दोनों में से कौन पाप कर रहा है और कौन पुण्य यह जानना इस उपन्यास में बहुत ही दिलचस्प है.

(5) आषाढ़ का एक दिन (Ashad ka Ek Din)

आषाढ़ का एक दिन पुस्तक मोहन राकेश द्वारा रचित है यह सन् 1958 प्रकाशित हुई थी. यह हिंदी भाषा में लिखा गया सर्वश्रेष्ठ नाटक है इसे वर्ष 1959 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

इस पुस्तक की कहानी पर निर्देशक मणि कौल ने इस पर आधारित एक फ़िल्म बनाई जिसने आगे जाकर साल की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला था. इस पुस्तक का जो शीर्षक है वह कालिदास की पुस्तक मेघदूतम की पंक्तियों से लिया गया है.

आषाढ़ का एक दिन पुस्तक की पूरी कहानी कालिदास के जीवन पर आधारित है, यह पूरा नाटक कालिदास की प्रेमिका मालिका पर केंद्रित है. मल्लिका कालिदास पर सच्चे हृदय से आगे बढ़ते हुए देखना चाहती है.

मगर कालिदास महत्वाकांक्षा और सत्ता के मुंह में पड़क्र अपना सब कुछ खो बैठते है. किस नाटक में यथार्थ और आदर्श के बीच में द्वंद देखने को मिलेगा.

इस पुस्तक को पढ़ने के बाद हिंदी नाटकों में आपकी रुचि बढ़ जाएगी, यह हिंदी नाटक की सर्वोत्तम पुस्तक है.

गोदान, प्रेमचंद द्वारा रचित सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है यह उनका अंतिम उपन्यास माना जाता है. हिंदी भाषा की अगर बात की जाए तो प्रेमचंद के उपन्यास के बिना यह अधूरी लगती है.

इस उपन्यास का प्रकाशन सन् 1936 में हुआ था. गोदाम भारत के ग्राम्य जीवन और कृषि संस्कृति का जीवंत महाकाव्य है. इसमें बड़े ही सरल और रोचक ढंग से गांधीवाद मार्क्सवाद और प्रगतिवाद को का पूर्ण परिप्रेक्ष्य में चित्रण हुआ है.

गोदान उपन्यास के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत का विशेष भाग, संस्कृति और जनजीवन को सजीव रूप से साकार पाते है. होरी एक किसान है जो कि अपने आसपास रहने वाले सभी को खुश रखना चाहता है वह इसके लिए बहुत मेहनत भी करता है लेकिन महाजनी व्यवस्था के चलते वह कभी सफल नहीं हो पाता है.

यह उस समय के प्रत्येक किसान के जीवन का मार्मिक चित्रण है, समय बदल गया है लेकिन आज के किसानों में भी आपको वह सभी समस्याएं नजर आ जाएंगी.

(7) मेलुहा के मृत्युंजय (Meluha Ke Mritunjay)

मेलुहा के मृत्युंजय पुस्तक अमीश त्रिपाठी द्वारा रचित है यह पुस्तक वर्ष 2011 में प्रकाशित हुई थी. यह पुस्तक इतनी रोचक ढंग से लिखी गई थी कि कुछ ही समय में यह लोकप्रिय हो गई और इस पुस्तक की कहानी पर एक हॉलीवुड फिल्म द इम्मोर्टल्स ऑफ़ मेलुहा का भी निर्माण हो चुका है.

मेलुहा के मृत्युंजय पुस्तक की कहानी एक शिव नामक युवक की है जो कि एक साधारण इंसान होता है लेकिन उसके कर्म इतने अच्छे होते है कि वह देवों के देव महादेव का रूप ले लेता है. इस कहानी में सूर्यवंशी शासकों पर लगातार कई संकट आते है और चंद्रवंशी शासक भी उन पर हमला कर देते है.

तो सूर्यवंशी शासकों का मानना है कि जब पृथ्वी पर हद से ज्यादा बुराई बढ़ जाती है तब एक माना एक अवतरित होता है इसी सोच पर यह कहानी आगे बढ़ती है.

(8) गुनाहों का देवता (Gunaho ka Devta)

गुनाहों का देवता उपन्यास हिंदी के महान उपन्यासकार धर्मवीर भारती द्वारा रचित है. यह सन् 1958 प्रकाशित हुई थी. इस उपन्यास के सजिल्द और अजिल्द को मिलाकर एक सौ से ज्यादा संस्करण छप चुके है.

यह प्रेम की कहानी पर आधारित है. इस उपन्यास पर कई नाटक और फिल्म बन चुके है.

गुनाहों का देवता उपन्यास की कहानी तीन मुख्य किरदारों चन्दर, सुधा और पम्मी के आसपास घूमती है. इसमें प्रेम के अव्यक्त और अलौकिक रूप का वर्णन किया गया है.

इस कहानी में चन्दर और सुधा कब प्रेम कर बैठते है उन्हें पता ही नही चलता है लेकिन दोनों एक दुसरे को बता नही पाते है और सुधा की शादी कही और हो जाती है. इसी का विस्तृत वर्णन किया गया है.

(9) वैशाली की नगरवधू (Vaishali Ki Nagarvadhu)

वैशाली की नगरवधू, आचार्य चतुरसेन द्वारा रचित है यह एक ऐतिहासिक उपन्यास माना जाता है. इसमें धार्मिक कथाओं को भी कुछ इस प्रकार से लिखा गया है कि ऐसा लगता है कि वह ऐतिहासिक घटनाएं हो. इस किताब में उस दौर के धार्मिक आंदोलनों के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की गई है.

इस किताब को लिखने के लिए आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने 10 वर्षों तक जैन, बौद्ध और हिंदू धर्म का सांस्कृतिक अध्ययन किया है. और स्वंय यह स्वीकार किया कि मैं अब तक की अपनी सारी रचनाओं को रद्द करता हूं और वैशाली की नगरवधू को अपनी एकमात्र रचना घोषित करता हूँ।

वैशाली में उस समय एक कानून होता था जिसके अनुसार वहा की सबसे खूबसूरत लड़की पर पुरे गणतंत्र का अधिकार होगा, इसका मतलब उसे नगरवधु बनना होगा. इस कानून के कारण आम्रपाली को मजबूरन नगरवधू बनना स्वीकार करना पड़ा.

और यही आम्रपाली आधी शताब्दी तक अपने युग के समस्त भारत के सम्पूर्ण राजनीतिक और सामाजिक जीवन का केन्द्र-बिन्दु बनी रही. उपन्यास में मानव-मन की कोमलतम भावनाओं, सामाजिक जीवन और धर्म का बड़ा हृदयहारी चित्रण किया गया है.

(10) बनारस टॉकीज (Banaras Talkies)

बनारस टॉकीज उपन्यास वर्ष 2015 का सबसे लोकप्रिय हिंदी उपन्यास है सत्य व्यास द्वारा रचित यह है उपन्यास काशी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के जीवन पर आधारित है.

इस तरह का उपन्यास हिंदी भाषा में पहले कभी देखने को नहीं मिला है और इसकी भाषा शैली को बहुत ही रोचक ढंग से लिखा गया है. इस पुस्तक में बनारस भाषा और वहां की संस्कृति का अंश भी देखने को मिलता है.

बनारस टॉकीज की पूरी कहानी काशी विश्वविद्यालय के भगवानदास हॉस्टल में रची है. यह कहानी तीन दोस्तों की है जो कि एक साथ काशी विश्वविद्यालय में पढ़ने जाते है.

वहां पर वे सभी वाकिये होते है जैसे मस्ती, चुहलबाज़ी, गालीगलौज इत्यादि और आगे बढ़ते हुए रोमांचक रोमांस और एक रूमानी रोमांच तक जाती है. लेकिन इस कहानी को अन्य पुस्तको की तरह नहीं लिखा गया है, इसके अलावा उपन्यास बेहद रोचक है.

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मेरा नाम नरेन्द्र वर्मा है मैं राजस्थान के एक कस्बे का रहने वाला हूँ। मैंने स्नातक (कॉमर्स) की पढ़ाई की है। मेरी रूचि नए लेख लिखना है। मुझे 7 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है।

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